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प्रशासन पस्त, माफिया मस्त: शोहरतगढ़ में खाकी को ठेंगा दिखा रहे ‘मिट्टी के सौदागर’!

सिद्धार्थनगर में 'मिट्टी' का काला खेल: महमूदवा ग्रांट में धरती का सीना चीर रहे खनन माफिया। सिस्टम सोया, माफिया जागा: शोहरतगढ़ में रात-दिन हो रहा अवैध खनन, आखिर कौन है इनका आका?

अजीत मिश्रा (खोजी)

सिद्धार्थनगर: खाकी और प्रशासन की नाक के नीचे ‘मिट्टी’ में मिल रहा कानून; शोहरतगढ़ में खनन माफिया का नंगा नाच!

सिद्धार्थनगर (बस्ती मंडल)।

  • मिट्टी के खेल में ‘मलाई’ का चक्कर! किसानों की बर्बादी पर क्यों खामोश है तहसील प्रशासन?
  • साहब! आपकी नाक के नीचे लुट रही है धरती मां; क्या शोहरतगढ़ में कानून का राज खत्म हो गया?
  • अवैध खनन या खुली लूट? महमूदवा ग्रांट में माफियाओं के आगे बौना साबित हो रहा प्रशासन।
  • खाकी का खौफ खत्म! धड़धड़ाते ट्रैक्टर और गरजते लोडर दे रहे अधिकारियों की मुस्तैदी को चुनौती।

जिले में कानून व्यवस्था को ठेंगे पर रखकर खनन माफियाओं ने अपनी सल्तनत खड़ी कर ली है। ताजा मामला शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम महमूदवा ग्रांट टोला शिवारे का है, जहाँ रात के सन्नाटे से लेकर दिन के उजाले तक धरती का सीना चीरकर अवैध कमाई का काला खेल जारी है। सवाल यह है कि आखिर किसके संरक्षण में ये ‘मिट्टी के सौदागर’ बेखौफ होकर सरकारी संपदा और किसानों की मेहनत पर डाका डाल रहे हैं?

दिन-रात गरज रहे लोडर, धड़धड़ा रही ट्रैक्टर-ट्रॉलियां

​महमूदवा ग्रांट में हालात ये हैं कि बिना किसी वैध अनुमति और कागजी कार्रवाई के मिट्टी का अवैध खनन धड़ल्ले से चल रहा है। लोडर और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का रेला इस कदर सक्रिय है कि ऐसा लगता है जैसे प्रशासन ने इन्हें खुली छूट दे रखी हो। सड़क पर दौड़ते ये अवैध वाहन न केवल धूल उड़ा रहे हैं, बल्कि नियम-कानून की भी धज्जियां उड़ा रहे हैं।

किसानों की बर्बादी पर खामोश है तंत्र

​स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि इस अंधाधुंध खनन से खेतों को भारी नुकसान पहुँच रहा है। भूमि का स्वरूप बिगड़ रहा है और पर्यावरण असंतुलन का खतरा मंडराने लगा है। माफिया अपनी जेबें गर्म कर रहे हैं, लेकिन इसका खामियाजा गरीब किसान को भुगतना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने कई बार अपनी आपत्ति दर्ज कराई, लेकिन उनके हिस्से सिर्फ आश्वासन और अनसुनी ही आई है।

प्रशासन की चुप्पी… लापरवाही या मिलीभगत?

​सबसे बड़ा सवाल शोहरतगढ़ प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर खड़ा होता है। इतनी बड़ी गतिविधि क्या वाकई अधिकारियों की नजर से ओझल है? या फिर ‘सुविधा शुल्क’ के खेल ने सिस्टम की आंखों पर पट्टी बांध दी है? ग्रामीणों में इस निष्क्रियता को लेकर भारी आक्रोश है। लोग अब खुलकर पूछ रहे हैं कि क्या प्रशासन भी इन माफियाओं के सामने नतमस्तक हो चुका है?

“क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहा है? खेतों को खोखला किया जा रहा है और जिम्मेदार अधिकारी दफ्तरों में चैन की नींद सो रहे हैं। यदि जल्द ही इस पर रोक नहीं लगी, तो जनता सड़कों पर उतरने को मजबूर होगी।”

नाराज ग्रामीण, महमूदवा ग्रांट

 

अब देखना होगा…

​अब देखना यह है कि जिले के उच्च अधिकारी इस मामले का संज्ञान लेकर खनन माफियाओं के हौसले पस्त करते हैं या फिर महमूदवा ग्रांट की मिट्टी यूं ही सरेआम नीलाम होती रहेगी। क्या बाबा का बुलडोजर इन अवैध खनन करने वालों के घरों तक पहुंचेगा, या कार्रवाई के नाम पर सिर्फ छोटी मछलियों को फंसाकर फाइल बंद कर दी जाएगी?

ब्यूरो रिपोर्ट, सिद्धार्थनगर।

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